दौर

  वो भी एक दौर था, ये भी एक दौर है तू कल कुछ और था, तू आज कुछ और है मोहोब्बत का जुनून चढ़ा था, फितूर था वो कल की कोई रात थी, अब आज दूसरी भोर है गाया किए नगमें यूही बैठे रहे बेसब्र से वो मेरी...

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ज़िन्दगी…

ज़िन्दगी ज़रा एहसास तो दे… जो बुझे न कभी, वो प्यास तो दे.. आ ज़रा वक़्त निकाल मेरे लिए… चलें कहीं दूर तलक, अपना हाथ तो दे… वो चार लम्हें में सिमट के कैद रखना मुझे, वो काम के बोझ तले तेरा मुरझा जाना, वो रोज़ तेरा मुझसे लड़ना...

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ख्वाब

बड़े बेआबरू से हैं ये ख्वाब… ना ठीक से आते हैं, ना कभी पूरा हुआ करते हैं… बिल्कुल तुझ पर गये हैं ये शायद… ना जान लेते हैं, ना जीने देते हैं… तकलीफ़ ये जो बयान करके दिल की, कर दिया कुसूर… जिस राह भी गुज़रते हैं, सब दवा देते...

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कसम…

ये जो तुमने ना बात करने की कसम खायी है… ये बारिश आज यूँ ही नहीं आई है… इज़ाफ़ा हो गया आज मेरी ज़िन्दगी में यूँ… ऐसे जो तुमने रूठने की रसम निभाई है… तुम्हें लगता है कि अब मैं भी बदल गया हूँ यूँ… बस हमने तो आज...

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अब हमारी आदत है

यूँ गुज़रे ज़मानो में रहना, अब हमारी आदत है यूँ ज़मीन को आसमा कहना, अब हमारी आदत है रंजिश कर लेता हूँ उससे, जिसको भी मैं अपना कहूँ और सबको अपना बनाना, ये हमारी आदत है आधा ही सही पर कुछ टूटा ख्वाब सा खवाबों में पूरा करते रहना...

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सुबहा

फिर से ये सुबहा आ गयी तंग करने… कल रात ही चिट्ठी लिखी थी हर रात की तरहा इसे.. बोला था कि अब थक गया हूँ बस… कल सुबा मत आना मिलने मुझसे.. पर मानती नहीं ये कभी भी मेरा कहना शायद मेरी तरहा ये भी ज़िद्दी है… परेशान...

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नम

फिर हवा का रुख़ गर्म क्यूँ है.. फिर से तेरी आँख नम क्यूँ है… अए दिल इतना तो बता… ये दर्द ही तेरा मरहम क्यूँ है… जलता है तू रोज़ किसी कोने मैं पड़ा… इतने बड़े जहाँ में जगह कम क्यूँ है… पत्‍थर से धूल फिर बनती है गिरती...

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स्कूल बचपन और दोस्त…

जीवन के इस मेले में… सबके साथ या अकेले में… जब हम बड़े हो जाते हैं… भगदड़ में खो जाते हैं… जब मिलता है कोई कोना…. जहाँ होता है बस खुद का होना… वो बचपन याद दिलाता है… गम कोसो दूर ले जाता है… जब आकाश में तारे होते...

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दिल तो बहुत है…

वक़्त नहीं मिल रहा आजकल हमें रिश्ते निभाने को, प्यार से बैठकर दो पल साथ बिताने को, दिल तो बहुत है कि बात करें हर बात पर, बस पलों की कुछ कमियाँ हैं, उनको साथ बिठाने को, तखत और अख़बारों की जगह अब, ले ली मोबाइल और कंप्यूटर ने,...

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वो वक़्त कभी तो आना है

ख़ामोश सा पानी अब,जम गया है इन आँखो में,शिकायतें बोहोत हैं,पर अब आह नहीं है सांसो में!! सोचा एक शक्स मिला है,दिल की बात बताने को,जब जब सोचा कुछ उसे बतायें,वो रूठ गया हमें रुलाने को!! अपना किस्सा बस अपने तक,रह जाता मन के ही भीतर,एक पल में यूँ...

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