Monthly Archives: January 2014

बुलबुल

इक लड़की को देखा, शरमाई सी हुई, गिनती रहती है तार्रों को, कभी खुद में गुम, कभी कर दे गुम, चेहरा उसका और करे बयां सितारों को! कुछ सूझा हमें, की उसे कहें, फिर लगा कहने को कुछ ना है, ऐसे ताउमार देखा करेंगे बस, यही आफ़साना, यही बयां...

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पल

मायूसी के आलम में, इक प्यार का झोंका लहराया,जब आँख हमारी बंद हुई, देखा हमने भी कुछ पाया! सफ़ेद किताबों के पन्नों सा, था दिल ये हमारा बेचारा,एक लफ्ज़ जुड़ा, आफसाना बना, और इश्क का मौसम ले आया!दुनिया जाने दुनियादारी, हमने कब उसपे हक है लिया,कुछ लोग अलग भी...

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हिस्सा

सबको चाहिए अपना हिस्सा, चाहे वो हो तिनका या इंसान, या कोई भगवान्! सबको है चिंता अपने हिस्से की,सबको फ़िक्र है अपने किस्से की,सब हैं मायूस से चूर-चूर,हैं अपनी ही धुन में सबसे दूर! सब प्यार की बातें करते हैं,सब ख़ुशी के कुछ पल ढूंडते हैं,सबको है प्यार का...

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सबको जाते यूँ ही देखा

फिर से चली है सर्द हवा, फिर धुल उडी है हलकी सी,यादों के आँगन में फिर से, एक साया सा हमने देखा! दिल में हुआ है कुछ फिर से, कुछ धुंआ उड़ा है फिर से कहीं,मैं फिर से बैठा जाता हूँ, ये क्या फिर से हमने देखा! कुछ स्याही...

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एक कविता

कुछ प्यार के पल जो बांटे थे, कुछ फूल भी थे कुछ कांटे थे!कुछ दर्द था मीठा-मीठा सा, एहसास था धीमा-धीमा सा!दिल को एक मंज़र याद सा था, एक प्यार भरा जज़्बात सा था!तब पतझड़ भी एक सावन था, गम भी खुशियों का आँगन था!झोंके यूँ हवा के चलते...

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तहसीन मुनव्वर की एक ग़ज़ल

फिर वही भूली कहानी है क्याफिर मैरी आँख में पानी है क्या फिर मुझे उसने बुलाया क्यों हैफिर कोई बात सुनानी है क्या ज़िन्दगी हो गयी सुनते सुनतेहम को यह मौत भी आनी है क्या आज फिर मुसकुरा के देखा हैआज फिर आग लगानी है क्या मुझ क्यों देख...

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