दिल तो बहुत है…

वक़्त नहीं मिल रहा आजकल हमें रिश्ते निभाने को,
प्यार से बैठकर दो पल साथ बिताने को,

दिल तो बहुत है कि बात करें हर बात पर,
बस पलों की कुछ कमियाँ हैं, उनको साथ बिठाने को,

तखत और अख़बारों की जगह अब,
ले ली मोबाइल और कंप्यूटर ने,
आदमी बढ़ गये है मगर अब,
बातें ना है कोई बनाने को,

हाथों में हाथ रहते थे कभी,
सब गम छोटे लगते थे,
मायूसी में भी हम खुश थे,
क्योंकि लोग थे साथ हमारे यूँ फिर,
दिलों के पेच सुलझाने को,

दूरी तो कम हुई है मगर,
दूर अब सब अपने चले गये,
दो कमरों के एक घर में भी,
मशीन हैं बात कराने को

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