Monthly Archives: June 2016

कसम…

ये जो तुमने ना बात करने की कसम खायी है… ये बारिश आज यूँ ही नहीं आई है… इज़ाफ़ा हो गया आज मेरी ज़िन्दगी में यूँ… ऐसे जो तुमने रूठने की रसम निभाई है… तुम्हें लगता है कि अब मैं भी बदल गया हूँ यूँ… बस हमने तो आज...

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अब हमारी आदत है

यूँ गुज़रे ज़मानो में रहना, अब हमारी आदत है यूँ ज़मीन को आसमा कहना, अब हमारी आदत है रंजिश कर लेता हूँ उससे, जिसको भी मैं अपना कहूँ और सबको अपना बनाना, ये हमारी आदत है आधा ही सही पर कुछ टूटा ख्वाब सा खवाबों में पूरा करते रहना...

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