ख्वाब

बड़े बेआबरू से हैं ये ख्वाब…
ना ठीक से आते हैं, ना कभी पूरा हुआ करते हैं…

बिल्कुल तुझ पर गये हैं ये शायद…
ना जान लेते हैं, ना जीने देते हैं…

तकलीफ़ ये जो बयान करके दिल की, कर दिया कुसूर…
जिस राह भी गुज़रते हैं, सब दवा देते हैं…

कसक ये जीने की उठती है हर घड़ी…
जाने किस तरहा तेरी आँखो के चराग़ जलते हैं…

ख़याल तेरा इस कदर उमड़ता है घटा बन के…
बिन बारिश सुबो-शाम हम भीगे चलते हैं…

तेरी आँखों की चमक के आगे सब फीका है…
दिल बहलाने को हम यूँ शायरी किया करते हैं…

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